
कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व स्पीकर के. आर. रमेश कुमार की एक टिप्पणी ने बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। सदन के भीतर दिए गए बयान में उन्होंने कहा—
“अगर बलात्कार होना तय है, तो लेट जाओ और उसका आनंद लो।”
इस टिप्पणी के दौरान सदन में हंसी की आवाज़ें भी सुनी गईं, जिसने विवाद को और गंभीर बना दिया।
बयान पर तीखी प्रतिक्रिया, पार्टी की मुश्किलें बढ़ीं
रमेश कुमार के बयान को लेकर न सिर्फ विपक्ष बल्कि कांग्रेस के भीतर से भी आलोचना शुरू हो गई है।
बेंगलुरु की सामाजिक कार्यकर्ता ब्रिंदा अडिगे ने बयान को “शर्मनाक और महिलाओं के खिलाफ हिंसा को सामान्य बनाने वाला” बताया।
“ऐसे बयान लोकतांत्रिक संस्थानों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करते हैं,” — ब्रिंदा अडिगे
टिप्पणी पर सवाल
के.आर. रमेश कुमार न केवल वरिष्ठ विधायक हैं, बल्कि वे कर्नाटक विधानसभा के पूर्व स्पीकर भी रह चुके हैं। ऐसे संवैधानिक पद पर रह चुके नेता से इस तरह की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि—यह केवल एक बयान नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों की सोच का प्रतिबिंब माना जाता है।

सोशल मीडिया पर उबाल, कांग्रेस की छवि पर असर
इस बयान का वीडियो और कोट सोशल मीडिया पर वायरल होते ही महिला अधिकार संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। हालांकि खबर लिखे जाने तक कांग्रेस पार्टी की ओर से कोई औपचारिक माफ़ी या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया।
जिस सदन से कानून बनते हैं, वहीं अगर असंवेदनशीलता पर ठहाके लगें— तो सवाल सिर्फ बयान का नहीं, व्यवस्था की संवेदना का होता है।
यह मामला एक बार फिर यह बहस खड़ी करता है कि जनप्रतिनिधियों की भाषा और सोच लोकतंत्र में कितनी जिम्मेदार होनी चाहिए — खासकर तब, जब मुद्दा महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा से जुड़ा हो।
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